कोलकाता : महानगर की गलियों से देश-विदेश तक हिन्दी साहित्य का परचम फहराने वाला एक स्तम्भ ढह गया। कवि आलोक शर्मा नहीं रहे।
रविवार की भोर ही उन्हें रवीन्द्र सरणी स्थित मारवाड़ी रिलीफ सोसायटी के गहन चिकित्सा कक्ष में भर्ती किया गया था। सोमवार की सुबह करीब नौ बजे उन्होंने अन्तिम साँस ली। उनके निधन से साहित्य जगत में शोक की लहर है।
कोलकाता राजस्थान संस्कृतिक विकास परिषद के महासचिव केशव भट्टड़ ने कवि आलोक शर्मा के निधन पर संवेदना प्रकट करते हुए कहा कि शंकर माहेश्वरी, मस्त दमानी, छविनाथ मिश्र, नवल और अब आलोक शर्मा भी, कोलकाता के बड़ाबाजार के हिंदी-राजस्थानी के सितारे देखते-देखते अंतरिक्ष के सितारे बन गए। इनकी संगत की महक मन में बसी है, बसी रहेगी। महानगर की अन्य साहित्यिक हस्तियों ने भी कवि आलोक शर्मा के निधन पर शोक जताया है।