आरजी कर वित्तीय घोटाला : आरोपित जूनियर डॉक्टर ने दाखिल की राहत याचिका

कोलकाता : राज्य सरकार द्वारा संचालित आर. जी. कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में बहु-करोड़ रुपये के वित्तीय घोटाले के आरोपित जूनियर डॉक्टर आशीष पांडे ने मंगलवार को विशेष अदालत में आरोपों से राहत पाने के लिए मुक्ति याचिका दाखिल की।

मामले की सुनवाई मंगलवार दोपहर विशेष अदालत में हुई, जहां पांडे के वकील आनंद बनर्जी ने अदालत के समक्ष यह याचिका रखी। वकील ने दावा किया कि उनका मुवक्किल निर्दोष है।

इस मामले में पांडे पांचवें और अंतिम आरोपित हैं, जिन्होंने मुक्ति याचिका दाखिल की है। इससे पहले आर. जी. कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के पूर्व प्रधानाचार्य संदीप घोष, उनके सहायक और बॉडीगार्ड अफसर अली, और दो निजी ठेकेदार बिप्लब सिन्हा व सुमन हाजरा भी ऐसी याचिकाएं दायर कर चुके हैं। अगली सुनवाई इस मामले में पांच अप्रैल को होगी।

कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश पर पिछले साल सीबीआई ने इस घोटाले की जांच शुरू की थी। बाद में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी स्वतः संज्ञान लेते हुए मामले में प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज किया।

सीबीआई द्वारा दाखिल आरोपपत्र में संदीप घोष को इस घोटाले का मुख्य साजिशकर्ता बताया गया है।

इस घोटाले में मुख्य रूप से निम्नलिखित आरोप लगाए गए हैं :

मेडिकल संस्थान में निविदा प्रक्रिया में हेरफेर।

राज्य लोक निर्माण विभाग को दरकिनार कर बाहरी ठेकेदारों से निर्माण कार्य करवाना।

अस्पताल से बायोमेडिकल कचरे की अवैध तस्करी।

पोस्टमार्टम के लिए आने वाली अज्ञात लाशों के अंगों को ऊंची कीमतों पर बेचने का संगीन आरोप।

इस घोटाले के साथ अगस्त 2024 में आर. जी. कर मेडिकल कॉलेज में एक महिला जूनियर डॉक्टर की दुष्कर्म के बाद हत्या के तार भी जोड़े जा रहे हैं। चिकित्सा जगत से जुड़े कुछ लोगों का दावा है कि पीड़िता को इस वित्तीय घोटाले में शामिल प्रभावशाली लोगों के काले रहस्यों का पता चल गया था, जिसके चलते उसे अपनी जान गंवानी पड़ी।

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