आंदोलन का नेतृत्व करने वालों को बनाया जा रहा निशाना : वरिष्ठ डॉक्टर के तबादले पर भाजपा का तृणमूल सरकार पर हमला

कोलकाता : आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में हुए बलात्कार और हत्या के मामले को लेकर मुखर रहे वरिष्ठ डॉक्टर सुबर्णा गोस्वामी के तबादले को लेकर सियासत तेज हो गई है। भाजपा नेता दिलीप घोष ने शनिवार को तृणमूल सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जो लोग इस मामले में न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं, उन्हें सरकार दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने दावा किया कि सरकार डराने-धमकाने की रणनीति अपनाकर आंदोलन को खत्म करना चाहती है, लेकिन भाजपा चुप नहीं बैठेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी इस मुद्दे पर अपना अभियान जारी रखेगी और सरकार को सत्ता से हटाने तक संघर्ष करेगी।

राज्य स्वास्थ्य विभाग की अधिसूचना के मुताबिक, पूर्व बर्दवान में डिप्टी चीफ मेडिकल ऑफिसर ऑफ हेल्थ (सीएमओएच)-II के पद पर तैनात डॉ. सुबर्णा गोस्वामी को दार्जिलिंग के टीबी अस्पताल में अधीक्षक के पद पर स्थानांतरित किया गया है। यह पद उनके वर्तमान पद से एक श्रेणी नीचे है। इसे लेकर विरोध के सुर उठने लगे हैं और इसे बदले की कार्रवाई माना जा रहा है।

भाजपा नेता दिलीप घोष ने कहा, “जो लोग आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं, उन्हें टारगेट किया जा रहा है। डॉ. सुबर्णा गोस्वामी ने इस मामले में खुलकर अपनी आवाज उठाई थी, इसलिए अब उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। यह सरकार विरोध करने वालों को दबाने के लिए तबादलों का हथकंडा अपना रही है, लेकिन यह आंदोलन को खत्म नहीं कर सकती।”

उन्होंने आगे कहा, “अब जब इस आंदोलन ने फिर से जोर पकड़ा है, तो सरकार उन लोगों को हटाने में जुट गई है, जो सबसे आगे खड़े हैं। लेकिन सरकार सिर्फ तबादला कर आंदोलन को नहीं दबा सकती। पूरा समाज अभया मामले में तृणमूल सरकार के खिलाफ खड़ा है और हम इस सरकार को उखाड़ फेंकने तक अपना अभियान जारी रखेंगे।”

तबादले पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. सुबर्णा गोस्वामी ने कहा कि वह एक सरकारी कर्मचारी हैं और उन्हें यह आदेश मानना होगा, लेकिन यह साफ है कि यह बदले की कार्रवाई है। उन्होंने कहा, “मुझे एक ऐसे अस्पताल में भेजा गया है, जहां लगभग कोई कार्यभार नहीं है, क्योंकि वहां बहुत कम मरीज भर्ती होते हैं। मेरा नया पद मेरे मौजूदा पद से एक श्रेणी नीचे है। यह मौजूदा सरकार के कार्यकाल में मेरा आठवां तबादला है, जिनमें से पांच बार मुझे समान रैंक पर ही इधर-उधर किया गया।”

उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि इस फैसले से उनका संघर्ष खत्म नहीं होगा। उन्होंने कहा, “मेरी लड़ाई जारी रहेगी। मैं अकेला नहीं हूं, इस आंदोलन से जुड़े अन्य लोगों को भी निशाना बनाया जा रहा है। जब प्रदर्शन अपने चरम पर था, तब मुझे पुलिस ने पूछताछ के लिए बुलाया था, लेकिन मैं डरा नहीं था और आगे भी नहीं डरूंगा।”

गौरतलब है कि आर.जी. कर कांड को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान कोलकाता पुलिस ने डॉ. सुबर्णा गोस्वामी और वरिष्ठ डॉक्टर कुनाल सरकार को पुलिस मुख्यालय में बुलाकर पूछताछ की थी। उस समय तत्कालीन पुलिस आयुक्त विनीत कुमार गोयल ने उनसे सवाल-जवाब किए थे। अब जब इस मामले में फिर से आवाज उठ रही है, तो डॉक्टरों के तबादले को लेकर सरकार घिरती नजर आ रही है।

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