West Bengal : तृणमूल पंचायत प्रमुख पर 2 वोटर कार्ड रखने का आरोप

कोलकाता : नदिया जिले में तृणमूल कांग्रेस की एक पंचायत समिति प्रमुख का नाम दो अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूची में दर्ज होने का मामला सामने आया है। इस खुलासे के बाद तृणमूल कांग्रेस बैकफुट पर आ गई है। यह भी पता चला है कि वह दोनों जगह वोट डालती हैं।

मामले में जिनका नाम सामने आया है, वह कल्याणगंज पंचायत समिति की प्रमुख शेफाली खातून हैं। उनके नाम दो विधानसभा क्षेत्रों—नकाशीपाड़ा और कल्याणगंज—की मतदाता सूची में दर्ज पाए गए हैं। दोनों क्षेत्र नदिया जिले में ही आते हैं।

इस मामले को लेकर भाजपा ने चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से शिकायत की है। भाजपा ने दस्तावेज सौंपते हुए आरोप लगाया कि एक ही व्यक्ति के नाम पर दो अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में वोटर कार्ड होना चुनावी गड़बड़ी का प्रमाण है।

मीडिया से बातचीत में शेफाली खातून ने कहा, “पहले हम नकाशीपाड़ा में रहते थे, इसलिए मेरा नाम वहां की मतदाता सूची में था। बाद में जब हम कल्याणगंज के देबग्राम में शिफ्ट हुए तो वहां मतदाता सूची में नाम जुड़वाया। मुझे जानकारी नहीं थी कि नकाशीपाड़ा की सूची में मेरा नाम अभी भी दर्ज है।”

हालांकि, भाजपा ने शेफाली खातून के इस स्पष्टीकरण पर तंज कसते हुए कहा कि प्रशासन से जुड़ी किसी जिम्मेदार व्यक्ति का ऐसा बयान हास्यास्पद है।

विवाद के बाद चुनाव आयोग ने कार्रवाई करते हुए नकाशीपाड़ा विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची से शेफाली खातून का नाम हटा दिया है।

दिलचस्प बात यह है कि बीते सप्ताह तृणमूल कांग्रेस की विस्तारित संगठनात्मक बैठक में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा पर पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची में अन्य राज्यों के लोगों के नाम जुड़वाने का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया था कि दो राज्यों के मतदाताओं के एक जैसे मतदाता पहचान पत्र (ईपीआईसी नंबर) के मामले सामने आए हैं। इस बीच ममता बनर्जी की ही पार्टी के नेता का दो विधानसभा क्षेत्र में अलग-अलग मतदाता कार्ड होने से उनके दावे सवालों के घेरे में हैं।

रविवार को चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी के इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए बयान जारी किया। आयोग ने कहा कि एक जैसे ईपीआईसी नंबर होने का अर्थ फर्जी या डुप्लीकेट मतदाता नहीं होता। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि अलग-अलग राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों में एक जैसे अल्फान्यूमेरिक सीरीज के कारण ऐसे मामले सामने आ सकते हैं।

हालांकि, तृणमूल कांग्रेस ने आयोग के इस स्पष्टीकरण को “आंखों में धूल झोंकने वाला” बताया और कहा कि यह आयोग के अपने ही दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं है।

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