◆ जीवन में सुख प्राप्ति के लिए परमात्मा को हृदय में बसाये
◆ निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज
कोलकाता : “जीवन में शांति और सुख बनाये रखने के लिए प्रभु को हृदय में बसाये रखें क्योंकि जब मन में प्रसन्नता बनी रहती है तब हर जगह शांति और आनंद की ही दिव्य अनुभूति होती है।’’ यह प्रेरणादायक संदेश निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने पश्चिम बंगाल प्रांतीय निरंकारी संत समागम के समापन सत्र में उपस्थित प्रभु-प्रेमियों को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। इस दो दिवसीय संत समागम में कोलकाता के अतिरिक्त कई अन्य जिलों से श्रद्धालु भक्तों ने सम्मिलित होकर सतगुरु के पावन आशीर्वचनों से लाभ प्राप्त किया।
सतगुरु माता जी ने भक्तों को सम्बोधित करते हुए फरमाया कि संतजन सदैव परमात्मा से जुड़कर निरंतर इसके एहसास में रहते हुए सभी के प्रति प्रेम एवं भाईचारे जैसे मानवीय गुणों को अपनाकर एक सुखद आनंदमयी जीवन जीते है। वास्तविक जीवन का उल्लेख करते हुए सतगुरु माता जी ने कहा कि सच्चा जीवन केवल वही है जिसमें परमात्मा का प्रेम और उसकी भक्ति का वास हो। इसलिए हमें प्रेमाभक्ति, समर्पण और कर्तव्यों को निभाते हुए अपने जीवन में प्रेम रूपी पुलों का निर्माण करना है। यही जीवन में सुख-शांति और समृद्धि का एकमात्र सरलतम साधन है।
अंत में सतगुरु माता जी ने सभी भक्तों से निरंकार प्रभु की जानकारी के उपरांत गृहस्थ जीवन में रहकर परिवार और समाज की सभी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए नित सेवा, सुमिरण और सत्संग के साधन द्वारा भक्ति करने का आग्रह किया।
समागम के अंतर्गत अनेक वक्ताओं, कवियों और गीतकारों ने अपनी रब्बी वाणियों एवं अनुभवों से हिन्दी, अंग्रेजी और बंगला भाषा में गुरु महिमा का भावपूर्ण वर्णन किया।
इस समागम में कोलकाता जोन के जोनल इंचार्ज, श्री मोहन प्रसाद साव ने परम् वंदनीय सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज तथा सत्कार योग्य निरंकारी राजपिता रमित जी का संतों को पावन आशीर्वाद देने हेतु हृदय से आभार व्यक्त किया। इसके साथ ही समागम स्थल में सम्मिलित हुए अतिथि गणों, प्रशासन के सकारात्मक सहयोग हेतु एवं साध संगत का भी धन्यवाद किया।