नौकरशाह बन गए हैं राजनीतिक सेवक : राज्यपाल

Jagdeep Dhankhar

सिलीगुड़ी : राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने राज्य के नौकरशाहों और शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों को राजनीतिक सेवक कहकर निशाना साधा है। मंगलवार को सिलीगुड़ी में उन्होंने कानून व्यवस्था की स्थिति को लेकर राज्य के मुख्य सचिव सहित अन्य अधिकारियों की आलोचना की।

आज राज्यपाल धनखड़ अपने परिवार के साथ कोलकाता से बागडोगरा एयरपोर्ट पहुंचे। वह अपने परिवार के साथ दो सप्ताह के लिए उत्तर बंगाल दौरे पर गए हैं। वे यहां सिलीगुड़ी में पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे। राज्यपाल ने आरोप लगाया कि दोषियों को छिपाने की कोशिश की जा रही है। राज्य के नौकरशाह अब जनता के सेवक नहीं रहे गए, वे राजनीतिक नौकर बन गए हैं। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो लोकतंत्र खत्म हो जाएगा। संवाददाता सम्मेलन के दौरान राज्यपाल ने राज्य के नौकरशाहों और शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों के आचरण पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि मैं लोकतांत्रिक मानदंडों और मूल्यों के कमजोर पड़ने से बहुत आहत हूं। राज्य में मानवाधिकारों का पालन नहीं हो रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के आईपीएस, आईएएस अधिकारियों और सह मुख्य सचिव का आचरण संवैधानिक प्रमुख के प्रति बहुत अच्छा नहीं है। वे संविधान को भूल रहे हैं। जो दस्तावेज सभी नागरिकों को उपलब्ध होने चाहिए। उन्हें संवैधानिक प्रमुख को उपलब्ध नहीं कराये गए। वह बिना किसी तैयारी या दस्तावेज के मेरे साथ बैठक में आ रहे हैं। मैं इस बारे में मुख्य सचिव, गृह सचिव और वित्त सचिव को बार-बार आगाह कर चुका हूं ।

राज्यपाल ने सवाल किया कि वे हर बात को हल्के में क्यों ले रहे हैं? धनखड़ ने यह भी आरोप लगाया कि वे कानून और संविधान की अवहेलना कर रहे हैं। राज्यपाल ने अंडाल पर हवाई अड्डे के निर्माण और आपात स्थिति के दौरान आपातकालीन आपूर्ति खरीद में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य प्रशासन के शीर्ष अधिकारी भ्रष्टाचार से जुड़े दस्तावेजों को दबाने की कोशिश कर रहे हैं। राज्यपाल ने आरोप लगाया कि वे अपराधियों को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं।

राज्यपाल ने यह भी कहा कि आज सुबह कोलकाता से रवाना होने से पहले उन्होंने मुख्य सचिव को राज्य की कानून व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यों को लेकर कड़ा संदेश दिया था। नौकरशाही में प्रशासनिक अस्पष्टता और प्रशासनिक कार्यों में आपराधिक गतिविधियों पर रोक लगनी चाहिए यह सुनिश्चित करना उनका कर्तव्य है ताकि अपराधी को कानूनी तरीके से दंडित किया जाए। कानून से ऊपर कोई नहीं है।

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