नंदीग्राम में हार का दर्द नहीं भूली हैं मुख्यमंत्री, विधानसभा में फिर किया जिक्र

कोलकाता : नंदीग्राम में 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान शुभेंदु अधिकारी के मुकाबले अपनी हार का दर्द मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अभी भी नहीं भूल पाई हैं। गुरुवार को एक बार फिर विधानसभा की कार्यवाही के दौरान संबोधन करते हुए उन्होंने दावा किया कि नंदीग्राम में उन्हें हराने के लिए दो घंटे लाइट बंद करके फर्जी मतगणना हुई थी।

विधानसभा में खड़े होकर ममता ने कहा, जो आज सरकार और हमारी पार्टी के खिलाफ बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं वह पहले हमारे साथ ही थे लेकिन कभी भी इस तरह की बातें नहीं की। नंदीग्राम में लाइट बंद करने के दो घंटे बाद, वह (शुभेंदु) जीत गया और मैं हार गई। मुख्यमंत्री ने विधानसभा में बिना नाम लिए शुभेंदु पर निशाना साधा।

इस बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नंदीग्राम का मुद्दा उठाया तो भाजपा विधायकों ने विधानसभा में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि शुभेंदु अधिकारी योजना लेकर दिल्ली गए हैं। मैंने कुछ बातें सुनी हैं।

उन्होंने दावा किया कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। वहां बंगाल भाजपा के तीन और नेता थे। उनका मुख्य एजेंडा समाज को तोड़ना, महिलाओं के खिलाफ अपराध को बढ़ाना, ऐसी स्थिति पैदा करना है जहां बंगाल की सरकार छोटी और घटिया दिखाई दे। भाजपा आदिवासियों, गोरखाओं और मतुआओं के बीच विभाजन पैदा करने की कोशिश कर रही है। भाजपा ने 2024 के लोकसभा चुनाव में फायदा पाने के लिए छोटी-छोटी पार्टियां बनाकर बंटवारा करने की नीति अपनाई है।

दूसरी ओर, जब मुख्यमंत्री शुभेंदु पर निशाना साधते हुए नंदीग्राम विधानसभा चुनाव में छप्पा-वोट लूटने का आरोप लगा रही थीं तो शुभेंदु अधिकारी ने भी पलटवार करते हुए पंचायत में वोट लूटने की शिकायत की है। शुभेंदु ने कहा कि त्रिस्तरीय वोट लूट लिया गया है। यह राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। नामांकन जमा करने की अनुमति नहीं दी गई। शुभेंदु का दावा है कि वोट चुपचाप हो गया। क्योंकि राज्य चुनाव आयुक्त ने अपनी जिम्मेदारी पर मतदान दिवस की घोषणा की।

शुभेंदु ने कहा कि मतदान के दिन की घोषणा से पहले कोई सर्वदलीय बैठक नहीं हुई थी। वहीं, शुभेंदु अधिकारी ने भी ममता के ”विभाजनकारी” बयान का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी समाज को बांटने की राजनीति करती हैं और भाजपा सबको जोड़ती है। लक्ष्मी भंडार में किसी को 500 मिलते हैं, किसी को 1000. यही तो भेदभाव है।

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