आपको कभी भी चपत लगा सकते हैं साइबर अपराधी, रहें सतर्क और देखें बंगाल के साथ देश में साइबर अपराध के आँकड़े

कोलकाता : तकनीक ने हम सभी के जीवन को आसान बना दिया और तकनीक पर टिका लगभग हर एक व्यक्ति ऑनलाइन लेन-देन की प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। यह प्रक्रिया सुरक्षित और तेज़ है इसलिए इसकी वर्तमान जरूरत हम सभी को है, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। लेकिन एक बड़ी आबादी के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर आने से ठगों ने इस क्षेत्र को भी निशाना बनाना तेजी से शुरू कर दिया है। साइबर ठगी कोई नयी बात नहीं है लेकिन ठगी के आँकड़ों में लगातार हो रही वृद्धि चिंता की बात जरूर है। पिछले 5 सालों में जितनी तेजी से ऑनलाइन लेन-देन का प्रचलन बढ़ा है उतनी ही तेजी से साइबर अपराध भी।
साइबर क्राइम के मामले में नंबर 1 पर उत्तर प्रदेश का नाम है। यहां साल 2020 में साइबर अपराध के कुल 11097 मामले दर्ज किए गए हैं। जबकि यहां साल 2016 में महज 2639 मामले ही दर्ज हुए थे। साल 2017-2019 तक क्रमशः 4971, 6280, 11416 मामले दर्ज किए गए हैं, जो यह दर्शाता है कि यह राज्य साइबर अपराधियों को पसंदीदा राज्य बन गया है।
साइबर अपराध की सूची में पश्चिम बंगाल का स्थान 13वां है। पश्चिम बंगाल में साल 2016 में जहां साइबर अपराधों की संख्या 478 थी, वहीं साल 2020 में यह संख्या 712 पर पहुँच गई है। इनके बीच के सालों यानि साल 2017-2019 तक पश्चिम बंगाल में साइबर अपराध के क्रमशः 568, 335 और 524 मामले दर्ज हुए थे। साल 2019 के अलावा लगभग हर साल ही मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।

केन्द्रीय गृह मंत्रालय सूत्रों की मानें तो साइबर स्पेस के उपयोग की वृद्धि के कारण ही साइबर अपराधों में वृद्धि हुई है। राज्यों की ओर से साइबर अपराध समेत अन्य अपराधों की रोकथाम के लिए, उनका पता लगाने, जांच करने, प्राथमिकी दर्ज करने की व्यवस्था की जाती है। केन्द्र सरकार ने भी साइबर अपराधों को निपटाने हेतु अपने तंत्र को सुदृढ़ बनाने के लिए उपाए किए हैं, जिनमें साइबर अपराधों के प्रति लोगों को जागरूक करने, चेतावनी जारी करने जैसे कदम शामिल हैं।
अपराधों की जानकारी के लिए “राष्ट्रीय साइबर
अपराध पोर्टल (www.cybercrime.gov.in)” शुरू किया है। धाखाधड़ी की तत्काल सूचना देने और धोखाधड़ी करने वालों द्वारा निधियों की चोरी को रोकने के लिए “नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग और प्रबंधन प्रणाली ” की भी शुरुआत की गई है। साइबर शिकायतों को ऑनलाइन दर्ज करने में सहायता प्राप्त करने के लिए एक टॉल-फ्री नम्बर 155260 शुरू किया गया है।

राज्यवार साइबर अपराधों की सूची देखें

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