इन्तहाँ हो गई, इंतजार की : कब खत्म होगा ‘राइटर्स बिल्डिंग’ की मरम्मत का काम!

8 सालों के बाद भी नहीं है किसी के पास कोई जवाब

अशोक सेनगुप्ता

कोलकाता : साल 2013 की 4 अक्टूबर को मुख्यमंत्री के रूप में ममता बनर्जी ने आखिरी बार राज्य सचिवालय ‘राइटर्स बिल्डिंग’ में काम किया था। उसके बाद राज्य के मुख्य सचिवालय को हावड़ा जिला स्थित नवान्न में स्थानांतरित कर दिया गया। इसका कारण था ‘राइटर्स बिल्डिंग’ की मरम्मत का काम। ‘राइटर्स बिल्डिंग’ के विभिन्न विभागों को धीरे-धीरे वहां से हटा दिया गया। नवान्न में सचिवालय के स्थानान्तरण के 8 साल से अधिक बीच चुके हैं लेकिन अभी तक ‘राइटर्स बिल्डिंग’ की मरम्मत का काम पूरा नहीं हुआ।

सवाल यह उठता है कि मरम्मत का काम अब तक खत्म क्यों नहीं हुआ और यह मरम्मत कार्य अभी किस चरण में है?

यहां आपको बताते चलें कि काम शुरू होने से पहले 2 साल तक ‘राइटर्स बिल्डिंग’ के मरम्मत पर एक सर्वेक्षण किया गया था। इसके तहत बिल्डिंग के कितने हिस्से तोड़े जाएंगे, यह तय करने के लिए विभिन्न स्तरों पर दर्जनों बैठकें हुई थी। सर्वेक्षण के बाद जादवपुर विश्वविद्यालय में वास्तुकला की शिक्षिका मधुमिता रॉय ने राज्य सरकार को एक रिपोर्ट सौंपी थी।

मूल रूप से ‘राइटर्स बिल्डिंग’ का निर्माण ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के लेखकों यानि राइटर्स के कार्यालय के लिए किया गया था, इसलिए इसे यह नाम मिला है। इमारत के वास्तुकार थॉमस ल्यों हैं, जिन्होंने इसका डिजाइन वर्ष 1776 में तैयार किया था। निर्माण के बाद वर्ष 1821, 1860, 1880-82, 1889 व 1906 में राइटर्स बिल्डिंग का कई बार विस्तार किया गया है। ‘राइटर्स बिल्डिंग’ के बीचों बीच खाली जगह में 4 नये भवनों का निर्माण किया गया। आज़ादी के बाद से ‘राइटर्स बिल्डिंग’ ही राज्य सरकार का मुख्यालय रहा है।

जादवपुर के शिक्षक-वास्तुकार द्वारा बनाए गए डिजाइन में कहा गया था कि राइटर्स बिल्डिंग के उन नए बनाए गए चारों भवनों को तोड़कर पीछे के ब्लॉकों को चौड़ा करने का प्रस्ताव दिया गया था। वहीं बीच के खाली हिस्से की एक मंजिला इमारत को मुख्य ब्लॉक और पीछे के ब्लॉक के साथ जोड़ने का प्रस्ताव दिया गया। उन भवनों में वीआईपी-लाउंज, कैंटीन, रेस्टोरेंट आदि बनाने का प्रस्ताव था। वहीं ऊपर की छत पर बगीचा बनाने के साथ ही एक हिस्से में संग्रहालय बनाने का भी सुझाव दिया गया था। इन सुझावों का राज्य प्रशासन की ओर से बनाए गए राइटर्स बिल्डिंग निर्माण संबंधी तकनीकी समिति ने समर्थन किया था।

लेकिन हेरिटेज कमीशन ने उस रिपोर्ट पर आपत्ति जताई। कमीशन ने कहा कि रिपोर्ट में प्रस्तावित डिजाइन राइटर्स बिल्डिंग का ऐतिहासिक महत्व का अंत कर देगी। कमीशन की ओर से बगीचा बनाने के विचार की वास्तविकता पर भी सवाल उठाए गए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि राइटर्स बिल्डिंग में  अगर संग्रहालय बन जाएगा तो आम लोगों की आवाजाही को नियंत्रण नहीं किया जा सकेगा और यह सुरक्षा के लिए ख़तरा हो सकता है। राइटर्स बिल्डिंग की मरम्मत के 2 स्तर हो सकते हैं। पहला यह कि उसके पुराने स्वरूप को वापस लाया जाए या फिर दूसरा वर्तमान समय को देखते हुए उसमें आवश्यक परिवर्तन किया जाए। आयोग ने कहा कि इन दो मुद्दों पर जोर नहीं देते हुए जादवपुर की ओर से जो 50 पेज की रिपोर्ट दी गई है, उसमें से 28 पेज की रिपोर्ट में सिर्फ राइटर्स बिल्डिंग का इतिहास है। अर्थात पुराने भवन के जीर्णोद्धार के लिए जो पूर्व सर्वेक्षण किए जाते हैं, वे नहीं किए गए हैं।

हेरिटेज कमीशन के एक अधिकारी के मुताबिक, पुराने भवन के जीर्णोद्धार का काम शुरू करने से पहले डिफेक्ट मैपिंग सबसे जरूरी है। दुनिया भर के आर्किटेक्ट बर्नार्ड एम. फील्डन को अपना गुरु मानते हैं। फील्डन की पुस्तक इस बात का विस्तृत विवरण देती है कि ऐसी स्थिति का सर्वेक्षण कैसे किया जाना चाहिए। लेकिन आयोग के अधिकारियों ने दावा किया, ”जादवपुर रिपोर्ट में ऐसा कोई सर्वेक्षण नहीं है।”

राइटर्स बिल्डिंग के निर्माण के समय बिजली का कोई उपयोग नहीं था। आग बुझाने के यंत्र, लिफ्ट, एसी, कंप्यूटर और तार नहीं थे। इसके चलते समय बीतने के साथ राइटर्स बिल्डिंग की अग्निशमन व्यवस्था चरमरा गई है। आयोग के अनुसार, जादवपुर रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया है कि इस संबंध में क्या किया जाएगा। हेरिटेज आयोग की आपत्तियों की जांच के बाद जादवपुर के वास्तुकार के प्रस्ताव में संशोधन का प्रयास किया गया। यांगून, म्यांमार में सचिवालय, राइटर्स बिल्डिंग पर आधारित है। फिलिप डेविस द्वारा इसका सुधार किया गया था। इसलिए उनकी सलाह भी ली गई।

इन असहमतियों के बीच ही राइटर्स की मरम्मत के लिए बिल्डिंग में तोड़फोड़ का काम जारी रहा। इस बारे में पूछे जाने पर मधुमिता देवी ने कहा, ”मैं सिर्फ इतना कह सकती हूँ कि हेरिटेज कमीशन द्वारा उठाए गए सभी सवालों का जवाब दिया गया है। मैं अभी इस पर और कोई टिप्पणी नहीं करूंगी।” रिपोर्ट को संकलित करने में शामिल जादवपुर के अन्य प्रोफेसरों का कहना है, “हेरिटेज कमीशन को कहीं समझने में भूल हुई है, रिपोर्ट इतनी विस्तृत नहीं थी।”

हालांकि, मई 2014 के पहले सप्ताह में विध्वंस का काम शुरू हो गया। मरम्मत कार्य शुरू होने के बाद, लोक निर्माण विभाग ने कहा कि सभी जानकारी वेबसाइट पर पोस्ट की जाएगी। इसे देखकर आम लोग अपने विचार और राय व्यक्त कर सकेंगे लेकिन ऐसा हुआ नहीं। दो चरणों में आठ ब्लॉकों को तोड़ा गया है। इसका क्षेत्रफल करीब ढाई लाख वर्ग फुट है। लोक निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता, जो पर्यवेक्षण के प्रभारी हैं, ने 6 जून 2015 को संवाददाताओं को बताया था कि तोड़ने का कार्य दो चरणों में किया जाएगा। पहले चरण का काम जुलाई के दूसरे सप्ताह तक चलेगा। इस दौरान दूसरे चरण के तोड़फोड़ के टेंडर को अंतिम रूप दिया जाएगा। तोड़े गए हिस्सों का सुंदरीकरण किया जाएगा लेकिन प्रस्तावित सुंदरीकरण कार्य भी नहीं किए गए।

मरम्मत के लिए किए जा रहे इस तोड़फोड़ में कितना पैसा खर्च होगा, इसके जवाब में निर्माण इंजीनियरों ने 2014 में इस रिपोर्टर से कहा था, ”इसके लिए सरकार को पैसा मिलेगा। जिन्होंने तोड़ने का टेंडर लिए है वे भुगतान करेंगे। कितना पैसा मिलेगा, यह तय करने की कुछ निश्चित रूपरेखा हैं। यह जांच कर निर्धारित की जाती है कि घर कितना पुराना है और किस चीज से बना है। पहले चरण के तोड़फोड़ में करीब 48 लाख रुपये सरकार को मिले थे।

बीबीडी बाग इलाके में उस समय ऑफिस स्पेस की कीमत करीब 20,000 रुपये प्रति वर्ग फुट थी। उस हिसाब को दिखाकर विपक्ष का आरोप है कि करीब 500 करोड़ रुपये की चीजों को नष्ट किया गया है। उनके मुताबिक इस पैसे का इस्तेमाल विकास के लिए किया जा सकता था। सीपीएम के राज्य सचिव सूर्यकांत मिश्रा ने मांग की कि राज्य सरकार इस मुद्दे पर एक श्वेत पत्र प्रकाशित करे।

अभी सुधार की क्या स्थिति है? राज्य शासन का दावा है कि राइटर्स के इतिहास को कायम रखते हुए उसे आजादी से पहले का दर्जा दिलाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। मरम्मत कार्य में देरी का एकमात्र कारण यह सुनिश्चित होना है कि पिछले 75 वर्षों में यहां किस हिस्से में कितना जोड़ा गया है, इसके लिए पुरानी और प्रामाणिक तस्वीरें एकत्र की गई हैं। इस संबंध में विशिष्ट जानकारी और चित्र राइटर्स बिल्डिंग के पुस्तकालय में भी मिले हैं। ब्लॉक वन, ब्लॉक टू और मेन ब्लॉक के कुछ हिस्सों का जीर्णोद्धार किया गया है। ब्लॉक वन में मकानों की संरचना समान रखी गई है। वहां दरवाजे और घरों को लंबा कर दिया गया है, बिजली के कनेक्शन को मौलिक रूप से बदल दिया गया है। इस पर कुल 150 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। सूत्रों का दावा है कि अब तक 40 करोड़ रुपये का काम हो चुका है। फ्लोरिंग और फिनिशिंग का काम बाकी है और उसके अलावा सब काम हो गया है।

लोक निर्माण विभाग के इंजीनियरों का कहना है कि संरचना का नवीनीकरण किए जाने के बाद भी अभी बहुत काम किया जाना बाकी है। ब्लॉक 1 और 2 और ब्लॉक 3 और 4 के बीच के दो बड़े घरों को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया गया है, ब्लॉक 3 और 4 के बीच और ब्लॉक 4 और 5 के बीच में दो बड़े घर हैं। उसे दोनों को तोड़ना है। लेकिन चौथे ब्लॉक में पूरी बिल्डिंग का पावर कंट्रोल सेंटर है। इसे बदलना काफी समय लेने वाला काम है। हमें इसके बारे में सोचना होगा। क्योंकि, राइटर्स के अलग-अलग हिस्सों में कई खंड हैं। उन्हें बिजली के बिना नहीं छोड़ा जा सकता है।

बीबीडी बाग का यह रेड हाउस कई युगों के इतिहास का गवाह है। जीर्णोद्धार का काम कब खत्म होगा, इसका जवाब लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के पास नहीं है। उनमें से एक का दावा है कि वे जो करने की योजना बना रहे हैं, उसका लगभग 37 प्रतिशत किया गया है। कुल मिलाकर कहें तो लंबे समय से चल रहे मरम्मत के काम वाला यह सबसे महत्वपूर्ण इमारत, राइटर्स बिल्डिंग गुमनामी में डूबता हुआ प्रतीत होता है।

 

 

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