इतिहास के पन्नों में 10 जुलाईः 1857 की क्रांति से पहले की बगावत का गवाह वेल्लोर किला

देश-दुनिया के इतिहास में 10 जुलाई की तारीख तमाम अहम वजह से दर्ज है। इस इतिहास में भारत के पहले स्वतंत्रता संग्राम का जब भी जिक्र आता है तो हमें सबसे पहले 1857 की क्रांति ही याद आती है, लेकिन 1806 में 10 जुलाई को ही वेल्लोर में भारतीय सिपाहियों ने अंग्रेजों के खिलाफ पहला विद्रोह किया था। वेल्लोर के किले में भारतीय सैनिकों ने करीब 200 अंग्रेज सैनिकों पर हमला किया। किले को अंग्रेजों से मुक्त कराकर टीपू सुल्तान के बेटे को वहां का राजा घोषित कर दिया। इतिहास में इसे वेल्लोर विद्रोह के नाम से जाना जाता है।

भारतीय सिपाहियों के इस विद्रोह की वजह अंग्रेजों का नया ड्रेस कोड था। इस ड्रेस कोड में हिन्दू सैनिकों को तिलक न लगाने और मुस्लिम सैनिकों को दाढ़ी काटने का हुक्म दिया गया था। इसके अलावा सभी कोएक कलगी लगा हैट भी पहनने का आदेश मिला था। फिर क्या था। सैनिकों ने अंग्रेजों के इस हुक्म का विरोध किया। अंग्रेजों ने विरोध करने वाले सैनिकों पर कोड़े बरसाए और उन्हें सेना से बर्खास्त कर दिया।

अंग्रेजों के इस कदम से सिपाहियों का गुस्सा और बढ़ गया। 9 जुलाई 1806 को टीपू सुल्तान की एक बेटी की शादी वेल्लोर के किले में ही थी। 1799 में टीपू सुल्तान का निधन हो गया था और उनका परिवार ईस्ट इंडिया कंपनी की पेंशन पर ही चल रहा था। अंग्रेजों ने इस परिवार को वेल्लोर किले का एक हिस्सा रहने के लिए दे रखा था। इस शादी में विद्रोही सैनिक भी इकट्ठे हुए और फैसला किया कि किले को अंग्रेजों से मुक्त कराया जाएगा। इधर शादी खत्म हुई और उधर भारतीय सैनिक अपने प्लान को अंजाम देने में लग गए। सिपाहियों ने अपने अंग्रेज अधिकारियों को सबसे पहले निशाना बनाया।

इसके बाद पूरे किले में सिपाही फैल गए और एक-एक कर सभी अंग्रेजों को मारा जाने लगा। किले का सेनापति जॉन फैनकोर्ट भी मारा गया और सुबह होते-होते किला भारतीय सैनिकों के कब्जे में आ गया। किले पर मैसूर सल्तनत का झंडा फहरा दिया गया और टीपू सुल्तान के बेटे को राजा घोषित कर दिया गया।

वेल्लोर से लगभग 25 किलोमीटर आरकोट में ब्रिटिश सेना का कैंप था। किसी तरह यह सूचना आरकोट पहुंच गई। अंग्रेजों ने तुरंत गोला-बारूद के साथ सैनिकों को वेल्लोर किले पर आक्रमण के लिए भेज दिया। ब्रिटिश सेना किले में घुसी और भारतीय सैनिकों का नरसंहार करने लगी। जो दिखा उसे गोली से उड़ा दिया गया। थोड़ी ही देर में सैकड़ों भारतीय सैनिक शहीद हो गए।

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