पश्चिम बंगाल के शांति निकेतन को यूनेस्को ने विश्व विरासत सूची में किया शामिल

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नयी दिल्ली : नोबेल पुरस्कार विजेता रबींन्द्रनाथ टैगोर के घर ‘शांति निकेतन’ को यूनेस्को ने विश्व विरासत सूची में शामिल किया है। यह देश के लिए बड़ी उपलब्धि है। शांति निकेतन पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में स्थित है। यूनेस्को की घोषणा के बाद यह भारत की 41वीं विश्व विरासत संपत्ति बन गया है। रविवार को रियाद (सऊदी अरब) में आयोजित 45वीं विश्व धरोहर समिति की बैठक में यह ऐतिहासिक निर्णय लिया गया।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के मुताबिक शांति निकेतन के लिए भारत का नामांकन मानदंड चार और छह के तहत प्रस्तावित किया गया था और साल 2010 से यूनेस्को की अस्थायी सूची का हिस्सा रहा है। शांतिनिकेतन के लिए नामांकन डोजियर जनवरी 2021 में विश्व विरासत केंद्र को प्रस्तुत किया गया था।

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शांति निकेतन को प्रतिष्ठित सूची में शामिल करने का सर्वसम्मति से निर्णय 21 देशों की विश्व धरोहर समिति द्वारा लिया गया। इस समिति में अर्जेंटीना, बेल्जियम, बुल्गारिया, मिस्र, इथियोपिया, ग्रीस, भारत, इटली, जापान, माली, मैक्सिको, नाइजीरिया, ओमान, कतर शामिल हैं। रूसी संघ, रवांडा, सेंट विंसेंट और ग्रेनेडाइंस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, थाईलैंड और जाम्बिया शामिल रहे।

विश्व धरोहर संपत्तियों में शांति निकेतन को शामिल करने के साथ, भारत में अब कुल 41 विश्व धरोहर स्थल हैं, जिनमें 33 सांस्कृतिक, 7 प्राकृतिक और एक मिश्रित संपत्ति शामिल है। इसके साथ भारत अब इटली, स्पेन, जर्मनी, चीन और फ्रांस के साथ 41 या अधिक विश्व धरोहर स्थलों वाले देशों की श्रेणी में पहुंच गया है।

एएसआई के मुताबिक साल 2014 के बाद से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 11 से अधिक नए विश्व धरोहर स्थलों को इस सूची में जोड़ा गया है। उल्लेखनीय है कि शांतिनिकेतन रवीन्द्रनाथ टैगोर के दूरदर्शी सोच का प्रतीक है। सन् 1863 में एक आश्रम के रूप में स्थापित, टैगोर ने गुरुकुल परंपरा का पालन करते हुए 1901 में इसे एक स्कूल और कला केंद्र में बदल दिया था। उनका दृष्टिकोण, “विश्व भारती”, प्राचीन, मध्ययुगीन और लोक परंपराओं के मिश्रण, वैश्विक एकता पर केंद्रित था।

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